लौकी की इस किस्म ने बदली किसान की तकदीर


लौकी की नरेंद्र शिवानी किस्म को आचार्य नरेंद्र कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के निर्वतमान प्रोफेसर डॉक्टर शिवपूजन सिंह द्वारा विकसित किया गया है। लौकी की इस किस्म की लंबाई डेढ़ से दो मीटर और वजन दो किलो तक होता है।

किसान अपने खेत में विभिन्न प्रकार की शानदार उन्नत किस्मों की सब्जियों की खेती करते हैं। ताकि वह उसको बाजार में बेचकर बेहतरीन कमाई कर सकें। यदि आप अपने खेत में सब्जियों की खेती करने के बारे में विचार कर रहे हैं, तो आपके लिए लौकी की सब्जी काफी अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। इसी कड़ी में आज हम आपके लिए लौकी की एक ऐसी शानदार उन्नत किस्म की जानकारी लेकर आए हैं, जो लौकी की समस्त किस्मों से अलग है। जिस प्रजाति के बारे में हम बात कर रहे हैं, उस किस्म का नाम नरेंद्र शिवानी लौकी है। लौकी की यह प्रजाति डेढ़ से दो मीटर लंबाई वाली वहीं इसका वजन एक से दो किलो तक होता है। लौकी की इस किस्म ने भारत के कई किसानों की तकदीर को बदला है। ऐसे ही एक किसान जिया हक जो अपने खेत में लौकी की उन्नत किस्म नरेंद्र शिवानी की खेती करते हैं।

लौकी की नरेंद्र शिवानी किस्म के बारे में जानकारी

लौकी की इस शानदार किस्म को आचार्य नरेंद्र कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के निर्वतमान प्रोफेसर डॉक्टर शिवपूजन सिंह द्वारा तैयार किया गया है। इस प्रजाति की लौकी की लंबाई डेढ़ से दो मीटर तक होती है। साथ ही, इसके फल का कुल वजन एक से दो किलो तक होता है। बतादें, कि इस किस्म की बुवाई करने के लिए जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त होता है। यदि किसान इसका मचान विधि से उत्पादन करते हैं, तो वह इससे काफी अधिक पैदावार हांसिल कर सकते हैं।

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लौकी की नरेंद्र शिवानी किस्म ने किसान को किया मालामाल

उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच, ब्लाक चितौरा के निवासी प्रगतिशील किसान जिया हक ने अपने खेत में लौकी की नरेंद्र शिवानी किस्म की खेती की एवं वर्तमान में वह इससे बेहतरीन उत्पादन पा रहे हैं। इसके साथ ही बाजार में भी उन्हें इस किस्म की लौकी का शानदार भाव मिल रहा है। किसान जिया हक का कहना है, कि वह अपने खेत में केवल लौकी की नरेंद्र शिवानी किस्म की खेती के साथ वह नरेंद्र हल्दी-2 का भी पैदावार कर रहे हैं। उनका कहना है, कि इन दोनों ही फसलों से किसान को काफी शानदार लाभ मिलेगा। क्योंकि, यह उत्पादन एवं शुद्धता के मामले में बाकी फसलों से अधिक लाभ देती हैं।


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